विश्वविद्यालय (अंक 44)
Posted in चेतन वाणी on Jun 10th, 2008 No Comments »
विश्वविद्यालय एडमिशन क्या कहना
भटक रहा है तन और मन क्या कहना
लगता है पैरिस ही उतरा दिल्ली में
चहुंओर है फन ही फन क्या कहना
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Posted in चेतन वाणी on Jun 10th, 2008 No Comments »
विश्वविद्यालय एडमिशन क्या कहना
भटक रहा है तन और मन क्या कहना
लगता है पैरिस ही उतरा दिल्ली में
चहुंओर है फन ही फन क्या कहना
Posted in चेतन वाणी on Jun 3rd, 2008 No Comments »
मोहन जी की ये कैसी लाचारी है
महंगाई की जंग साथियो जारी है
कर्नाटक में कमल खिला देखा जबसे
लगता है अब लोकसभा की बारी है।
Posted in चेतन वाणी on May 27th, 2008 No Comments »
नगर नोएडा लगता कुछ घबराया है
एक पिता ने रिश्ता नहीं निभाया है
निठारी को नहीं भुला हम पाए थे
आरूषि ने फिर से हमें रुलाया है
Posted in चेतन वाणी on May 19th, 2008 No Comments »
अधिकारी भी चादर तानें लेटे हैं
नेतागण इक दूजे पर ऐठे हैं
जयपुर के ये बम धमाके बोल रहे
घर के दुश्मन घर में आकर बैठे हैं।
Posted in चेतन वाणी on May 13th, 2008 No Comments »
सांस सांस देश पे चढ़ाने वालों को नमन
अठारह सौ सतावन भूल नहीं पाते हैं
लक्ष्मी बाई, तांत्या टोपे, जफ़र की कुर्बानी
गली-गली, गांव-गांव, घूम-घूम गाते हैं
देश के लिए जो तन-मन-धन वार गए
उन रण बांकुरों पे वारी-वारी जाते हैं
जिनकी शहादत से भारत आजाद हुआ
उन बलिदानियों को शीश हम झुकाते हैं।
Posted in चेतन वाणी on May 6th, 2008 No Comments »
ना बिजली ना पानी है
गर्मी की मनमानी है
महंगाई ने मार दिया
दिल्ली की शैतानी है
Posted in चेतन वाणी on Apr 28th, 2008 No Comments »
आम आदमी रोता है तो रोने दो
खून खराबा होता है तो होने दो
हत्याएं सरेआम हो रही दिल्ली में
राजा अपना सोता है तो सोने दो।
Posted in चेतन वाणी on Apr 14th, 2008 No Comments »
नई सुबह और नया सवेरा लाया है
राग खुराना फिर से उसने गाया है
सर्कस से जो शेर निकलकर भागा था
हाथ जोड़ कर फिर सर्कस में आया है।
Posted in चेतन वाणी on Apr 9th, 2008 No Comments »
बजट का मटका देखो कैसे फूटा है
आम आदमी बिल्कुल टूटा-टूटा है
महंगाई का पंजा जम कर मार दिया
यू पी ए ने मिलकर हमको लूटा है।
Posted in चेतन वाणी on Mar 31st, 2008 No Comments »
गरम कढ़ाई में जो खुद ही तला गया
वर्दी को हथियार बनाकर चला गया
एनकाउंटर करते-करते ही राजबीर
खुद एनकाउंटर में ही देखो छला गया
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