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	<title>अपनी दिल्ली - परिचय</title>
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	<description>नज़र आपकी खबर हमारी</description>
	<pubDate>Wed, 25 Apr 2007 10:31:50 +0000</pubDate>
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		<title>परिचय</title>
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		<pubDate>Wed, 25 Apr 2007 10:19:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>

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		<description><![CDATA[तीन साल पहले हमने &#8216;अपनी दिल्ली&#8217; समाचार पत्र के रुप में जो छोटा सा पौधा लगाया था। वह इतनी अल्पावधि में ही पाठक, विज्ञापनदाता व संरक्षकों के स्नेह, समर्थन व आशीर्वाद के बल पर एक मजबूत वृक्ष बन गया है। इस अवसर पर हम अपने पाठकों, विज्ञापनदाता व संरक्षकों के प्रति आभार प्रकट करना अपना [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>तीन साल पहले हमने &#8216;अपनी दिल्ली&#8217; समाचार पत्र के रुप में जो छोटा सा पौधा लगाया था। वह इतनी अल्पावधि में ही पाठक, विज्ञापनदाता व संरक्षकों के स्नेह, समर्थन व आशीर्वाद के बल पर एक मजबूत वृक्ष बन गया है। इस अवसर पर हम अपने पाठकों, विज्ञापनदाता व संरक्षकों के प्रति आभार प्रकट करना अपना कर्तव्य मानते हैं। आपके उत्साहवर्धन की वजह से ही हम इसे नए कलेवर व राष्ट्रीय स्वरूप के साथ आपके समक्ष पेश करने का साहस जुटा रहे हैं। हमें उम्‍मीद है कि अपनी दिल्ली को पहले की ही तरह आप सभी का समर्थन व सहयोग मिलता रहेगा। &#8216;अपनी दिल्ली&#8217; समाचार पत्र में हमने पाठकों को सच्चाई से अवगत कराने के साथ ही उन्हें स्थानीय निकाय से लेकर प्रशासन की और सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठे राजनेताओं की कमियों के बारे में बताया है। हां हमने महज सनसनी पैदा करने या चरित्र हनन की खबरें प्रकाशित करने से हमेशा ही परहेज किया है। हालांकि आज की पत्रकारिता इन्हीं दो बातों को इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। बावजूद इसके हम इस जाल में नहीं फसें हैं तो इसका श्रेय भी हमारे पाठकों को ही जाता है, जिन्होंने हमें अपने समर्थन का संबल प्रदान कर हमारे प्रयासों को सफल किया है। हमने &#8216;अपनी दिल्ली&#8217; के माध्यम से जनता की समस्या व परेशानियों को प्रमुखता से प्रकाशित कर संबंधित विभागों को उनका निराकरण करने के लिए बाध्य करने के साथ-साथ आम आदमी की आवाज बुलंद करने का भी प्रयास किया। इसमें हम किस हद तक सफल रहे हैं इसका फैसला तो आप सब ही करेंगे। हमने सरकार के जनहित संबंधी फैसले व विकास की भावी योजनाओं को भी उतनी प्रमुखता दी है, जितनी सरकार की कमियों को। क्योंकि हमारा मानना है कि सरकार और जनता के बीच एक सशﾀत माध्यम की भूमिका निभाना ही किसी समाचार पत्र की सफलता की कसोटी होता है। अगर हम सरकार के किसी गलत फैसले की आलोचना करते हैं तो हममें अच्छे कार्यों की सराहना करने की हिम्मत भी होनी चाहिए। यह अवसर हमारे लिए आत्ममंथन करने के साथ-साथ अतीत की कमियों पर निगाह डालते हुए भविष्य में उन्हें न दोहराने का संकल्प लेने का भी है। हम विश्वास दिलाते हैं कि भविष्य में भी समाचारों में निष्पक्षता व विश्वसनीयता बनाए रखेंगे और आपने जो भरोसा जताया है उसे कायम रखने में अपनी ओर से कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेंगे।<br />
<strong>धन्यवाद</strong><br />
<strong>आपका<br />
संजय गुप्ता - मुख्य सम्पादक</strong><br />
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