छोटे मंझोले समाचर पत्रों का विकास अत्यंत आवश्यक
May 6th, 2007 by admin
नई दिल्ली। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि छोटे तथा मंझोले समाचार पत्रों का विकास करना अत्यंत आवश्यक है। यही दो तरह के समाचार पत्र ऐसे है जो देश की ग्रामीण व क्षेत्रिय समस्याओं की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करते हैं। उनका समुचित विकास होने से समाज के गरीब व वंचित वर्ग के लोगों के साथ ही हर व्यक्ति की पहुंच मीडिया तक आसान हो जाएगी। वह गत दिनों ‘मीडिया और उसके दायित्व’ विषय पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री सिंह ने कहा कि छोटे तथा मंझोले समाचार पत्रों के विकास में रोड़ा अटकाने वाले तत्वों से वह वाकिफ हैं। इनका स्थानीय स्तर पर प्रकाशन तथा प्रकाशन प्रक्रिया में निरंतर प्रौद्योगिकी सुधार के संसाधनों की कमी इनके विकास के बाधक तत्वों में प्रमुख है। उन्होंने कहा कि छोटे समाचार पत्रों का प्रसार (सर्कुलेशन) अधिक नहीं होता और वे स्थानीय प्रकृति के होते हैं। इसलिए इन्हें आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में वाणिज्यिक विज्ञापन नहीं मिल पाता। इन्हीं कारणों से समाचार संग्रहण की योग्यता और इनके वास्तविक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन सबके बावजूद छोटे समाचार पत्रों के प्रबंधकों को समाचार पत्रों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संसाधनों और संभावनाओं की तलाश जारी रखनी होगी। इसके साथ ही आबादी के लक्षित वर्गों के लिए सूचना के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में भी अपने आप को स्थापित किए रहना भी इन समाचार पत्रों के लिए आवश्यक है। श्री सिंह ने कहा कि मीडिया राजनीतिक घटनाक्रमों और मुद्दों की रिपोर्टिंग किस प्रकार करता है और समाज के लोगों पर दबाव बनाने में कैसी भूमिका निभाता है यह एक शोध का विषय है। लेकिन इन्टरनेट के विकास उपग्रह तथा केबल नेटवर्क में अप्रत्याशित वृद्घि, क्षेत्रिय समाचार पत्रों के निरंतर विकास और समाचार व मनोरंजन को विभाजित रेखा समाप्त होने के बाद मीडिया के स्वरूप में भी काफी परिवर्तन हुआ है। ऐसी प्रतिस्पर्धात्मक दौड़ में छोटे और मंझोले समाचार पत्रों को अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छोटे तथा मंझोले समाचार पत्र देश के ग्रामीण तथा अर्द्घशहरी क्षेत्रों की सूचना, संचार और मनोरंजन संबंधी जरूरतों को पूरा करते हैं। वे स्थानीय है यही उनकी ताकत है। सामान्यता ग्रामीणों की पहुंच इन्टरनेट, उपग्रह तथा केबल नेटवर्कों तक नहीं है। उनकी सूचना संबंधी जरूरतें आज भी छोटे-मंझोले समाचार पत्रों, रेडियो, स्थानीय दूरदर्शन केन्द्रों से ही पूरा होती हैं। इसलिए छोटे समाचार पत्रों का विकास करना अति आवश्यक है।