राहुल ने भीड़ जुटाई, वोट नहीं (अंक - 40)
May 12th, 2007 by admin
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक और नेहरू परिवार के इकलौते वारिस राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी की बढ़त बनाने के लिए धुआंधार रोड शो को संबोधित किया। मगर इस रोड शो की हकीकत यह है कि इस चुनाव में श्री गांधी ने रोड शो के माध्यम से भीड़ जुटाने में कामयाबी हासिल तो की है, मगर पार्टी के लिए वोट बटोरने में सफल नहीं हो सके हैं। उत्तर प्रदेश के जिन-जिन क्षेत्रों में उन्होंने रोड शो को संबोधित किया उसमें कांग्रेस के समर्थक मतदाता कम और राहुल गांधी को देखने वाली तथा कांग्रेसियों द्वारा जुटाई गई भीड़ अधिक थी। इस रोड शो के आयोजन से यह बात भी स्पष्ट हो चुकी है कि आगामी लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को नेहरू परिवार की तथा स्वयं की अमेठी सीट से जीत हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी की मेहनत करनी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजनीतिक परिदृश्य की समीक्षा करने वाले पर्यवेक्षकों व कुछ समाचार पत्रों के अनुसार मतदान से पूर्व राहुल गांधी ने मोतीलाल नेहरू के गृह शहर इलाहाबाद, जौनपुर, आजामगढ़ वाराणसी आदि क्षेत्र में रोड शो को संबोधित किया। इस रोड शो में उपस्थित होने वाली भीड़ में कांग्रेस के समर्थक कम और नेहरू परिवार के वारिस को देखने वाले अधिक थे। इनमें से अधिकांश लोग ऐसे भी थे जिन्हें कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धन का लालच देकर बुलाया था। मतदान से पूर्व राहुल गांधी ने जिन स्थानों पर रोड शो को संबोधित किया वहां बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और इसके घटक दलों के उम्मीदवारों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष रहा था। धुआंधार रोड शो के आयोजन के बाद भी कांग्रेस चौथे स्थान पर है।इतनी मेहनत के बाद भी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की साख लगातार गिरती ही चली जा रही है। लाख कोशिशों के बावजूद कांग्रेसी अपने समर्थन में मतदाताओं को रिझा नहीं पा रहे हैं। मतदाताओं के प्राथमिक रुझान से यह भी पता चल गया था कि इस बार के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को कोई खास बढ़त मिलने वाली नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण केन्द्र सरकार की नीतियां व बढ़ती महंगाई बताई जा रही है। हरिसेन गंज के 77 वर्षीय किसान राम नरेश पटेल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से देश में आवश्यक वस्तुओं की कीमत में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। इससे आम जन-जीवन काफी प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि कई वर्ष हो गए मगर संसाधनों के अभाव में उनके बच्चे स्कूल जाने से वंचित हैं। इसमें मुलायम सिंह यादव की सरकार जिम्मेवार है तो केन्द्र सरकार भी कम नहीं। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी की हार का कारण केन्द्र सरकार की जन-विरोधी नीतियां हैं। उनका कहना है कि केन्द्र सरकार जनता के हितों की अनदेखी कर उदारवादी व उद्योगवादी नीति अख्तियार कर रही है। जिससे अंतर्राष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों और देश के उद्योगपतियों को फायदा हो रहा है। आज भी सरकार की नीतियों के कारण देश की 90 प्रतिशत आबादी त्राहि-त्राहि कर रही है। इसलिए इसका प्रभाव उत्तर-प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर पड़ना संभव था।