पंजाब में आतंकवाद फैलाने की कुचष्टा (अंक 42)
May 26th, 2007 by admin
नई दिल्ली। खुफिया विभाग को इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि पाकिस्तान की मुख्यतः गुप्तचर संस्था आई.एस.आई. ने एक बार फिर से पंजाब को हिंसा की आग में झोंकने की साजिश रची है। इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपनी पनाह में आए बホबर खालसा इंटरनेशनल के मुखिया बधावन सिंह बब्बर को हथियार के रुप में इस्तेमाल किया है। इंडिया का मोस्ट वांटेड वधावन सिंह बब्बर इन दिनों आई.एस.आई. की पनाह में लाहौर में अपने दिन गुजार रहा है। उल्लेखनीय है कि पृथक खालिस्तान की मांग को लेकर पंजाब में आतंकवाद फैलाने वाले संगठनों में बब्बर खालसा इंटरनेशनल का नाम सर्वोपरि था और इसके मुखिया वधावन सिंह के सिर पर सैकड़ो निर्दोषों के खून का इल्जाम है। सुरक्षा बलों से बचने के लिए ही वह इन दिनों लाहौर में शरण लिए है और वहां आई.एस.आई. हर तरह से उसका ख्याल रख रही है।खुफिया विभाग के अनुसार डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह द्वारा गुरु गोविंद सिंह के समान वेशभूषा धारण कर अखबार में प्रकाशित विज्ञापन के बाद सिखों में डेरे के प्रति पनपे आक्रोश व हिंसा की वारदातों को बढ़ावा देने के पीछे बधावन सिंह बब्बर का पूरा-पूरा हाथ है। लाहौर में रहते हुए भी वधावन सिंह बब्बर पंजाब के कट्टरपंथी सिख ग्रंथियों से निरंतर संपर्क बनाए हुए है। खुफिया विभाग को यह जानकारी भी मिली है कि भंटिडा में डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ भड़की हिंसा से पहले तलवंडी साबों के निकट स्थित गुरुद्वारे के ग्रंथी के साथ वधावन ने फोन पर बातचीत की थी। यह ग्रंथी अपने कट्टरपंथी विचारों के लिए जाना जाता है। खुफिया विभाग को यह भी पता चला है कि वधावन ने डेरा विवाद के बाद पंजाब के सिखों में पैदा हुए आक्रोश के शोलों को हवा देने के लिए दमदमी टकसाल व सिख स्टूडेंटस फेडरेशन में अपने करीबियों से संपर्क कर उन्हें इस अवसर का लाभ उठाते हुए मुर्दा हो चुके खालिस्तान आंदोलन को फिर से जीवित करने को कहा है। उसने अपने लोगों से इस विवाद को ठंडा न होने देने और डेरे पर हमले की आड़ में पंजाब में संप्रदायिकता फैलाने को भी कहा है। इसने इस काम के लिए आवश्यक धन व हथियार मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है। खुफिया विभाग का कहना है कि आई.एस.आई. पंजाब के कई वर्षों से शांत होने और वहां आतंकवाद का सफाया हो जाने के बाद निराश थी। उसने कई बार खालिस्तान समर्थक संगठन के नेता व अपने यहां पनाह लिए हुए आतंवादियों से पंजाब में दुबारा से हिंसा का तांडव शुरु करने को कहा था। मगर जन सहयोग न मिलने की वजह से संगठन व आतंकवादी नेता अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पा रहे थे। डेरा विवाद के बाद आई.एस.आई. को अपने मंसूबे पूरे होते नजर आने लगे हैं। अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए एक बार फिर से उसने अपने विश्वस्त वधावन सिंह का इस्तेमाल किया। जिसने अपने आकाओं को कतई निराश नहीं किया और डेरा विवाद की आड़ में पंजाब में अशांति फैलाने और आतंकवाद के शोले भड़काने के प्रयास करने शुरु कर दिए हैं। अपने राजनीतिक स्वार्थों की वजह से सिखों की शीर्षस्थ संस्था अकाल तチत और पंजाब की अकाली सरकार भी इस मामले में डेरे के खिलाफ सख्त रवैया अपना कर अनजाने में ही वधावन सिंह बब्बर व उस जैसे अन्य आतंकवादियों के हित साधने का काम कर रही है। एक मामूली से विवाद के इतना तूल पकड़ने की घटना को अभी तक केन्द्रीय गृह मंत्रालय अभी तक धार्मिक उन्माद भड़कना ही मान रहा था। इन घटनाओं के पीछे आई.एस.आई. के इरादे पर पंजाब के आतंकवादियों का हाथ होने संबंधी खुफिया विभाग की रिपोर्ट ने गृह मंत्रालय के होश उड़ा दिए हैं। पता चला है कि गृह मंत्रालय ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को सांप्रदायिकता व हिंसा फैलाने की कोशिश करने वाले तत्वों से सख्ती से निपटने और हर हालत में राज्य में शांति व्यवस्था कायम रखने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अगर पंजाब सरकार राज्य की जनता के जान-माल की सुरक्षा संबंधी कदम उठाने में नाकाम रहती है तो केन्द्र सरकार को मजबूरन इस दिशा में सख्त कदम उठाने होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी। वैसे खुफिया विभाग और गृह मंत्रालय को ऐसी सूचनाएं तो मिल रही थीं कि पंजाब में अमन-चैन का वातावरण कायम हो जाने की वजह से आई.एस.आई. व पंजाब में सक्रिय आतंकवाद संगठन के नेता वहां फिर से हिंसा का तांडव शुरु करने की साजिश रच रहे हैं। मगर उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि यह साजिश जल्दी ही सफल हो जाएगी। खुफिया विभाग और गृह मंत्रालय को इस बात की आशंका भी है कि पंजाब के वर्तमान हालात को देखते हुए कनाडा, ब्रिटेन वह अन्य देशों में छिपे आतंकवादी नेता भी वधावन की तरह ही पंजाब में अपने समर्थकों को नए सिरे से सक्रिय करने का प्रयास कर सकते हैं। अगर ऐसा हो गया तो फिर इसके बहुत ही गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।यदि हालात पर काबू पाने के लिए समझदारी से काम न लिया गया तो आई.एस.आई. और उसके भाड़े के लोग पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों में भी सांप्रदायिकता फैलाने वाली वारदातों को अंजाम देने के प्रयास कर सकते हैं।