विस चुनाव की तैयारी में जुट गई शीला (अंक 9)
Oct 12th, 2007 by admin
नई दिल्ली। वर्ष 2003 के दिसम्बर के विधानसभा चुनाव में विकास के नाम पर जीत हासिल करने वाली दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को अब अपनी पार्टी, उसके कार्यकर्ता और सहयोगी मंत्रियो पर भरोसा नहीं रहा। उन्हें यकीन हो गया है कि आगामी वर्ष 2008 का विधानसभा चुनाव पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगी मंत्रियों के भरोसे नहीं जीता जा सकता है।
इसीलिए अब उन्होंने चुनावी रणभूमि में जीत हासिल करने के लिए अभी से ही दिल्ली के रेजिडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इन ऐसोसिएशनों को सरकार के पक्ष में करने व चुनावी बेड़ा पार लगाने के लिए नित्यप्रति बैठकें आयोजित की जा रही है और जनता को रिझाने के लिए हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने का वायदा किया जा रहा है।
इन्हीं रेजिडेण्ट वेलफेयर ऐसोसिएशनां को एकजूट करने के लिए आगामी 30 अक्तूबर को नॉर्थ दिल्ली में बिजली समस्याओं में सुधार के नाम पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें नॉर्थ दिल्ली पावर लिमिटेड के अधिकारी व इस इलाके के तमाम रेजिडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। इस कार्यशाला के आयोजन की जिम्मेवारी एकडे नाम और गैर-सरकारी संस्था के संचालक किरण बढेरा को दिया गया है। जबकि रेजिडेंट वेफेयर ऐसोसिएश्न के पदाधिकारियों को इकट्ठा करने की जिम्मेवारी मुखर्जीनगर स्थित दिल्ली रेजिडेण्ट वेलफेयर मोर्चा के अध्यक्ष डी.के. तनेजा दिल्ली सिटीजन फोरम के अध्यक्ष डॉ. एम.के. मोहन्ती एवं नॉर्थ-ईस्ट फेशन के अध्यक्ष के. मुजीब को दी गई है।
हालांकि चुनावी नैया को पार लगाने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित द्वारा रेजिडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशनों का सहारा लेने की रणनीति कोई नई नहीं है। 2003 के विधानसभा चुनाव के पूर्व भी उन्होंने भागीदारी एपेक्स बॉडी बनाकर दिल्ली के करीब 1600 रेजिडेण्ट वेलफेयर ऐसोसिएशनों को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया था। मगर चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपने इन चुनावी घोड़ों से नाता तोड़ लिया था।
अब जबकि उन्होंने इस बात का एहसास हो गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के कार्यकर्ताओं और सहयोगी मंत्री उनकी मदद नहीं करेंगे तो उन्होंने अपने पुराने साथियों (भागीदारी एपेक्स बॉडी) को एकत्रित करना आरंभ कर दिया है।
सूत्र बताते हैं कि इस बार मुख्यमंत्री ने दिल्ली के सभी रेजिडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशनकी एकजुट करने की जिम्मेवारी किसी एक संस्था को न देकर कई संस्थाओं को देने का निर्णय लिया है। उत्तरी दिल्ली में यदि दिल्ली रेजिडेण्ट वेलफेयर मोर्चा, दिल्ली सिटीजन फोरम और नार्थ ईस्ट फेशन क जिम्मा सौंप गया है तो दक्षिणी, मध्य और पश्चिमी दिल्ली में संजय कौल, पंकज अग्रवाल, बीना सक्सेना, जे.एस. चढ्ढा, कैप्टन ए.के. एनरौल आदि का जिम्मेवारी मिलेगी। इसी प्रकार पूर्वी दिल्ली में भी सशक्त रेजिडेण्ट वेलफेयर ऐसोसिएशनों के फेडरेशनों की तलाश की जा रही है। इनमें किरण बढेरा का नाम बिल्कुल तय है।
श्रीमती बढेरा मयूर विहार और दूसरे आसपास की कालोनियों के रेजिडेण्ट वेलफेयर ऐसोसिएशनों के पदाधिकारियों को एकजूट करने में सक्षम दिखाई देती है।
गौरतलब है कि इस वक्त मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की भागीदारी योजना के अंतर्गत दिल्ली की करीब 1600 रेजिडेण्ट वेलफेयर ऐसोसिएशनों का पंजीकरण है।
वैसे तो पूरी दिल्ली में चार हजार से भी अधिक रेजिडेण्ट वेलफेयर ऐसोसिएशन काम कर रही है मगर सभी की स्थिति मजबूत नहीं है। और न ही वे भागीदारी योजना में पंजीकृत है। इसलिए मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित ने उन्हीं एसोसिएशनों को चुनावी नैया का पतवार सौंपने का निर्णय लिया है जो भागीदारी में शामिल है, मगर बिजली पानी व अन्य मूल भूत समस्याओं के कारण सरकार से खफा होकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
हालांकि इनमें से कुछ ऐसोसिएशनों के लोगों ने निगम चुनाव के दौरान भाजपा का दामन थाम लिया था मगर नगर निगम चुनाव जीतने के बाद पार्षदों के प्रदर्शन से नाखुश ऐसे एसोसिएशनों के लोग सरकार के साथ हाथ से हाथ मिलाकर चलने में ही भलाई समझ रहे हैं।