मुख्यमंत्री ही नहीं लाना चाहती हैं किलोमीटर स्कीम! (अंक 10)
Oct 22nd, 2007 by admin
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में यदि कोई व्यक्ति ब्ल्यू लाइन बसों की चपेट में आकर काल कवलित होता है तो होता रहे। इसकी चिंता यहां की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को नहीं है। क्योंकि वह नहीं चाहती कि दिल्ली की जनता और सरकार को लाभ पहुंचाने वाली किलोमीटर स्कीम को लागू किया जाए। इसकेञ् पीछे न तो ट्रांसपोर्टर लॉबी का हाथ बताया जा रहा है और न ही बस ऑपरेटरों का ही किसी प्रकार का दबाव है। बताया यह जा रहा है कि इसमें श्रीमती दीक्षित का स्वार्थ ही छिपा है जो किलोमीटर स्कीम को लागू करने में रोड़ा बना हुआ है।
हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर से पहले तक दिल्ली में किलोमीटर स्कीम के अलावा सार्वजनिक प्रणाली को दुर्घटनारहित बनाने के लिए अन्य योजना लाने का सख्त आदेश दे दिया है। बावजूद इसके श्रीमती दीक्षित किलोमीटर स्कीम अथवा अन्य दूसरी योजनाओं को लाने के मूड में दिखाई नहीं दे रही हैं। हां, यह बात अलग है कि वह प्रतिदिन ब्ल्यू लाइन बसों से होने वाली दुर्घटनाओं संबंधित खबर प्रकाशित व प्रसारित किए जाने को लेकर मीडिया को दोषी साबित करने में लगी हैं। इतना ही नहीं, अपनी कमी को छिपाने के लिए इन दिनों वह प्रतिदिन शाम को अपने निवास पर मंत्रिमंडल सहयोगियों की बैठक भी बुला रही हैं। यह बैठक किलोमीटर स्कीम लाने अथवा किसी नई योजना को मूर्त रूप देने के लिए नहीं बुलाई जा रही है बल्कि इसलिए बुलाई जा रही है कि ब्ल्यू लाइन बसों को सड़कों पर बनाए रखने के लिए कोर्ट के आदेश का बहाना अथवा तोड़ क्या है।
मजे की बात यह है कि किलोमीटर स्कीम लागू किए जाने को लेकर परिवहन मंत्री हारून युसूफ और ट्रांसपोर्टर लॉबी ने भी हामी भर दी है। सूत्रों के अनुसार परिवहन मंत्री श्री यूसुफ तो यह चाहते हैं कि दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए दिसंबर में किसी योजना का क्रियान्वयन करने से बेहतर है कि अभी से ही किलोमीटर स्कीम को लागू कर दिया जाए। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टर लॉबी को भी इससे कोई एतराज नहीं है। मगर मुख्यमंत्री की हठधर्मिता के आगे किसी की कुछ नहीं चल पा रही है।
दिल्ली सरकार के आधिकारिक सूत्रों का यहां तक कहना है कि किलोमीटर स्कीम को लागू करने के लिए परिवहन विभाग के अधिकारियो ने नई कार्य योजना तैयार भी कर ली है। मगर मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित अधिकारियों और अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों की बैठक बुलाकर समय को टालना चाहती हैं। ताकि कोर्ट के द्वारा नियत समय पर सरकार यह कह सके कि अधिकारियों ने अभी तक किसी नई योजना का कार्यरूप तैयार नहीं किया है। इसलिए कुछ और समय दिया जाए।
हालांकि मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित के इस रवैये से उनके मंत्रिमंडल में ही मतभेद भी पैदा हो गया है। ऐसा नहीं है कि दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल में मतभेद पैदा होने का यह कोई नया मामला है। मगर ब्ल्यू लाइन बसों को लाइन पर लाने के लिए की जाने वाली कवायद को लेकर मंत्रिमंडल दो खेमों में बंटा हुआ है।
बताया यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस समस्या को सुलझाने के लिए प्रतिदिन अपने घर पर मंत्रिमंडल सहयोगियों की बैठक ले तो रही हैं, मगर इस बैठक में परिवहन मंत्री प्रायः अनुपस्थित ही पाए जाते हैं। हां, यह बात जरूर है कि वह परिवहन विभाग के अधिकारियों की मार्फत अपनी राय मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित तक पहुंचा रहे हैं।