नौ महीने में दिल्ली का बस किराया होगा दोगुना! (अंक 12)
Nov 15th, 2007 by admin
नई दिल्ली। राजधानी की सड़कों से ब्ल्यू लाइन बसों को पूरी तरह हटाने की दिशा में दिल्ली सरकार द्वारा किया जा रहा काम न केवल कछुआ गति से चल रहा है बल्कि यह आम जनता के लिए दुखदायी भी साबित होगा। यदि सरकार निर्धारित समय सीमा वर्ष 2009 के मध्य दिल्ली की सड़कों से ब्ल्यू लाइन बसों को हटाकर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में नई वातानुकूलित और साधारण लो फलोर बसों को लाने में कामयाब हो जाती है तो लोगों को वर्तमान समय की अपेक्षा दोगुना किराया देना होगा।
हालांकि सरकार वर्ष 2008 की जुलाई तक करीब 525 वातानुकूलित बसों में से करीब 25 बसों को लाने का दावा कर रही है। मगर उसके रवैये से ऐसा नहीं लगता कि इससे दिल्ली के लोगों को सफर करने में सुविधा मिल सकेगी।
वर्तमान समय में लोगों को डीटीसी और ब्ल्यू लाइन की साधारण बसों में यात्रा करने के लिए पांच किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए दो रुपये किराया देना पड़ रहा है। इसके साथ ही पांच से दस किलोमीटर तक पांच रुपये और इसके ऊपर सात और दस रुपये देना पड़ता है। जबकि वातानुकूञ्लित लो फलोर वाली हाई कैपिसिटी बसों में सवारियों को पांच किलोमीटर तक तीन रुपये और इसके बाद दस और 12 रुपये किराया देना पड़ता है।
डीटीसी के सूत्रों के अनुसार वर्ष 2008 की जुलाई में जब डीटीसी के बेड़े में 25 नई वातानुकूलित और बगैर वातानुकूलित लो फलोर बसें आ जाएंगी तो सवारियों को पांच किलोमीटर तक यात्रा करने के लिए निम्नतम किराया पांच रुपये और इससे ऊपर की दूरी तय करने पर दस रुपये और 15 रुपये किराया देना होगा। इसके साथ ही डीटीसी की साधारण बसों में सफर करने पर लोगों को पांच किलोमीटर तक सफर करने के लिए पांच रुपये ही देने होंगे। इसका मतलब यह कि आने वाले नौ महीनों में दिल्ली के लोगों को बसों में सफर करने के लिए दोगुने से भी अधिक किराया देना होगा। इतना ही नहीं है, दिल्ली की सड़कों पर लो फलोर वातानुकूलित और साधारण बसें दिल्ली की सड़कों पर तभी दौड़ सकेगी जब उसके लिए विशेष रूप से कोरिडोर का निर्माण कराया जाएगा। हालांकि दिल्ली की सड़कों पर वातानुकूलित और साधारण लो फलोर बसें चलाने का सरकार का यह फैसला कोई नया नहीं है। इसकी योजना तभी बनाई जा चुकी थी जब मेट्रो रेल परियोजना का काम आरंभ हुआ था। हालांकि दो साल पहले सरकार ने दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार लाने की योजना में परिवर्तन लाकर नया रूप दिया था। उसी समय यह निर्णय लिया गया था कि दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखकर वातानुकूलित और साधारण लो फलोर बसें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही उसी समय से इन बसों को चलाने के लिए कोरिडोर के निर्र्माण का कार्य भी आरंभ कर दिया गया था। मगर सरकार की लचर व्यवस्था के चलते अब तक तीन कोरिडोर का ही निर्माण कराया जा सका है। इनमें अंबेडकर नगर से दिल्ली गेट, वसंत विहार से शिवाजी स्टेडियम और वसंत विहार से सुपर बाजार का कोरिडोर शामिल है। जबकि इन बसों को चलाने के लिए करीब एक दर्जन से भी अधिक कोरिडोर बनाने की योजना की मंजूरी सरकार ने दो साल पहले ही दे दी थी। ऐसी स्थिति में यदि दिल्ली की जनता सरकार से यह अपेक्षा रखे कि उसे निकट भविष्य में ब्ल्यू लाइन के एवज में सफर करने के लिए सरकार की ओर से सस्ती और सुविधापूर्वक कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था दी जाएगी तो लोगों का यह सोचना बेमानी ही साबित होगा।