भाजपा नेताओं में जारी है सात्ता का संघर्ष (अंक 23)
Jan 21st, 2008 by admin
नई दिल्ली। ‘पार्षदों ने विधायक को पीटा’, ‘विधायक ने पार्षद को पीटा’, ‘पार्षद ने अधिकारी को पीटा’, ‘मण्डल अध्यक्ष के उम्मीदवार ने चुनाव प्रभारी को पीटा’, ‘जिला भाजपा चुनाव में भाजपा नेता व उनके समर्थक आपस में भिड़े’। समाचार पत्रों में अकसर इस शीर्षक से समाचार पढ़ने को मिल जाते हैं। उपरोक्त सभी शीर्षकों को पढ़ने के बाद इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अनुशासन का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सत्ता के संघर्ष में किस कदर अनुशासनहीन हो गए हैं। हालत यह है कि आज भाजपा के नेता ही भाजपा की कब्र खोदने में लगे हैं।
गत सप्ताह रोहिणी स्थित नाहरपुर गांव में विधायक एवं पार्षदों के बीच हुई मारपीट इस बात का प्रमाण है कि पार्टी का हर छोटा-बड़ा नेता क्षेत्र में सर्वेसर्वा बनना चाहता है। इस घटना में जहां क्षेत्र के विधायक जयभगवान अग्रवाल ने अपने ही क्षेत्र के निगम पार्षद के अलावा अन्य कई निगम पार्षदों तथा निगम में स्थायी समिति के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता पर मारपीट करने का आरोप लगाया वहीं उक्त निगम पार्षदों ने ऐसी किसी घटना होने पर अनभिज्ञता जाहिर की। सूत्रों की मानें तो प्रदेश व निगम में बुरी तरह से व्याप्त गुटबाजी के कारण ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक स्थायी समिति के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता पिछले निगम चुनाव से ही विधायक बनने का सपना संजोये हुए हैं। लेकिन क्षेत्र के वर्तमान विधायक जयभगवान अग्रवाल की साफ सुथरी छवि व लोकप्रियता के चलते वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। यही कारण है कि वे हर कदम पर विधायक को मात देने की कोशिश करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में जापानी पार्क के समीप सम्पन्न हुए रामसेतु बचाओ महासम्मेलन को सफल बनाने के लिए विश्व हिन्दु परिषद द्वारा स्थानीय तैयारियों के लिए विधायक जय भगवान अग्रवाल व स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन विरोधी गुट के नेताओं ने स्थानीय पार्षद की शह पर अपनी ओर से तैयारियों को पलीता लगाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। लेकिन वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके। इतना ही नहीं कार्यक्रम की सफलता के बाद जब विधायक द्वारा निगम व दिल्ली सरकार से संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया तो उस कार्यक्रम में निगम महापौर आरती मेहरा, सदन के नेता सुभाष आर्य ने तो शिरकत की, लेकिन स्थायी समिति के अध्यक्ष व उनके समर्थक पार्षद इस कार्यक्रम से नदारद रहे।
सूत्र तो यह भी बताते हैं कि निगम के कई आलाधिकारियों को भी विरोधी गुट द्वारा कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया। इन सभी घटनाओं से इन नेताओं को कुछ लाभ हुआ हो या नहीं लेकिन इतना जरूर है कि इन घटनाओं के बाद भाजपा की छवि अवश्य खराब हुई है। इस क्षेत्र के साथ लगता भाजपा का बवाना जिला भी गुटबाजी के मामले में किसी तरह से पीछे नहीं है। यहां तो हालत यह है कि एक ही जिले में दो-दो महामंत्री कार्य कर रहे हैं। यह पार्टी में व्याप्त गुटबाजी का ही नतीजा है कि जिले के अंतर्गत आने वाले 30 मण्डलों में से करीब एक दर्जन मण्डलों का चुनाव ही नहीं करवाया गया और उन मण्डलों पर एक ही गुट के नेताओं को मनोनीत कर दिया गया।
दिलचस्प बात यह है कि जिन मण्डलों में मण्डल अध्यक्षों का मनोयन किया गया है उनमें से कुछ मण्डल तो ऐसे भी हैं जिनका मण्डल अध्यक्ष उन नेताओं को बनाया गया है जिन्होंने गत निगम चुनाव के दौरान खुल कर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ कार्य किया था।
हालांकि प्रदेश अधिकारियों का दावा है कि बवाना जिला का चुनाव सर्वसम्मति से किया गया था और विनोद सेहरावत को जिला अध्यक्ष तथा विजयपाल को जिला महामंत्री घोषित किया गया था। इस घोषणा के समय जिला चुनाव प्रभारी एवं निगम के नेता सुभाष आर्य, ग्रामीण विकास समिति के अध्यक्ष मास्टर आजाद सिंह, शाहबाद दौलतपुर से भाजपा विधायक कुलवंत राणा, निगम पार्षद निर्मला ठाकुर, हरीश अवस्थी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। इतना ही नहीं निर्वाचित हुए अध्यक्ष ने महामंत्री पद की चिट्ठी विजयपाल को थमा भी दी। लेकिन गुटबाजी के चलते करीब दो माह बाद ही जिला अध्यक्ष की कुर्ञ्सी पर आसीन हुए विनोद सेहरावत ने जिला महामंत्री पद की एक और चिट्ठी विधायक श्री राणा के कट्टर समर्थक सुरेन्द्र सोलंकी को भी थमा दी। दिलचस्प बात यह है कि सर्वसम्मति से चुनाव सम्पन्न होने की घोषणा करने वाले नेता आज इस स्थिति पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि भाजपा जिला बवाना के अध्यक्ष पद पर काबिज विनोद सेहरावत ने गत निगम चुनाव में बवाना से निर्वाचित निर्दलीय पार्षद नारायण सिंह के समर्थन में खुल कर कार्य किया था और वहां से पराजित भाजपा उम्मीदवार डा. रामनिवास सेहरावत ने इस बात की शिकायत प्रदेश अधिकारियों को भी की थी। लेकिन पार्टी ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके अलावा प्रेम नगर, पीतमपुरा, नजफगढ़ सहित न जाने कितने मण्डल ऐसे हैं जिनके चुनाव में चुनाव अधिकारी व भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट हुई। ऐसा नहीं है कि पार्टी आलाकमान को इन घटनाओं की जानकारी नहीं है, लेकिन प्रदेश स्तर पर व्याप्त गुटबाजी के चलते वे भी इस समस्या से आंख मूंदे बैठे हैं।
गुटबाजी से दूर रहने वाले भाजपा नेताओं का मानना है कि यदि पार्टी आलाकमान द्वारा जल्द ही मण्डल से लेकर प्रदेश स्तर तक फैली गुटबाजी पर जल्द ही अंकुश नहीं लगाया गया तो दिल्ली के आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के नेता आपस में ही लड़ कर रह जाएंगे और सत्ता एक बार फिर से कांग्रेस के हाथों में चली जाएगी।