दिल्ली सरकार करेगी अनधिकृत कॉलोनियों का समुचित विकासः शीला (अंक 36)
Apr 14th, 2008 by admin
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने कहा है कि राजधानी की सभी अनधिकृत कॉलोनियों का दिल्ली सरकार समुचित विकास करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि वे बेहतर जीवनशैली में रह सके।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से अधिकार मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने 1409 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नियमित होने के बाद अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे 40 लाख लोग लाभाविन्त होंगे। श्रीमती दीक्षित प्रगति मैदान में अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण प्रक्रिया के बारे में आयोजित भागीदारी कार्यशाला के समापन समारोह में बोल रही थीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अलावा दिल्ली के शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान, विधायक सर्वश्री वीर सिंह धिंगान, बलजोर सिंह, बलराम तंवर के अलावा सभी जिलो की अनधिकृत कॉलोनियों के निवासी कल्याण समिति के सदस्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दिल्ली सरकार को देने से अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने और अन्य कार्यों को तेजी से पूरा करने तथा अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में आसानी होगी। श्रीमती दीक्षित ने कहा कि दिल्ली की सभी अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्य पहले से ही पूरे कराये जा रहे हैं और अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने संबंधी अधिसूचना जारी हो जाने के बाद सभी संबंधित एजेन्सियों से विकास कार्य युद्घ स्तर पर शुरू करने को कहा गया है ताकि अनधिकृत कॉलोनियों में सुविधाओं से वंचित लोगों को सभी जरूरी सुविधा मुहैया कराई जा सके।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए पहले से ही अनधिकृत कॉलोनी विकास बोर्ड का गठन किया जा चुका है और 2800 करोड़ रुपये की राशि इस मद में आंवटित की जा चुकी है उन्होंने अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे लोगों को बधाई दी कि उनके सतत् संघर्ष के बाद अब उन्हें अनधिकृत कॉलोनियों में रहने का सुनहरा अवसर मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित कराने में दिल्ली सरकार ने दिल्ली नगर निगम, डीडीए और केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा उसी का परिणाम है कि आज इन कॉलोनियों को नियमित करने की कार्यवाही शुरू होने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बिजली के मीटर तेज चलने और विभिन्न कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को बेवजह तंग करने की शिकायतें भी मिल रही हैं। इन बातों से दिल्ली सरकार पूरी तरह वाकिफ है और सरकार ने इन कंपनियों को साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि वे बिजली कटौती अधिक न करें जिससे आने वाली गर्मियों में बिजली कटौती से लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां बिजली की कटौती गर्मियों में करती है तो इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने से भी सरकार नहीं चूकेगी।
उन्होंने कहा कि बिजली की खपत कम करने वाले उपभोक्ताओं को गर्मी और सर्दियों में 150-200 यूनिट प्रतिमाह खपत करने पर एक रुपये की छूट मिलेगी।
श्रीमती दीक्षित ने भागीदारी को जनता के सशक्तिकरण की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि इससे ऐसी प्रणाली विकसित की गई है जिसमें नागरिक अपने आरडब्ल्यूए के माध्यम से न केवल सरकार की नीतियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं बल्कि इन नीतियों के निर्माण और निगरानी में भी मदद देते हैं।
शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री के सतत प्रयासों से ही अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्यों की शुरूआत हो पाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से अधिकार मिलने के बाद अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का सपना अब दिल्ली सरकार पूरा करेगी।
चार दिवसीय भागीदारी कार्यशाला में विभिन्न जिलों की निवासी कल्याण समितियों के 700 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर कॉलोनियों से संबंधित अपने सुझाव दिए।
इससे पहले श्रीमती दीक्षित ने ऑब्जवर रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए अपनी सरकार की भागीदारी पहल पर विचार व्यक्त किए। श्रीमती दीक्षित ने कहा कि भागीदारी एक एक आंदोलन बन गया है जिसने लोगों को एक साथ लाकर खड़ा किया है और उनमें दिल्ली के प्रति अपनेपन, खुद के विश्वास और जिम्मेदारी की भावना जागृत की है और जनता निर्णय की भागीदारी में शामिल हुई हैं। भागीदारी पहल में इको-क्लब, विद्यालय कल्याण समितियां, सांझा प्रयास, आरडब्ल्यूए, आपकी रसोई आदि शामिल हैं। शुरू में भागीदारी में 11 समूह शामिल हुए थे जिनकी संख्या बढ़कर
2,000 हो गई है। यह संतोष का विषय है कि लगभग 2,000 और समूह इसमें शामिल हो गए हैं जो कि अनधिकृत कॉलोनियों की आरडब्ल्यूए हैं। इससे सरकार और जनता के बीच भागीदारी की गति तेज होगी।