शराब के नशे में शबाब का मिश्रण (अंक 18)
Dec 12th, 2007 by admin
अब लड़कियां भी शराब परोसेंगी, सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी है। मयखानों में चार चांद लगेंगे। शराब ज्यादा बिकेंगी। कमाई ज्यादा होगी। लड़कियों के लिए रोजगार निकलेगा। कहा जा रहा है कि लड़कियों को समानता का अधिकार दिया जा रहा है। उन्हें मर्दों के बराबर लाकर खड़ा किया जा रहा है और न जाने क्या-क्या दलीलें दी जा रही हैं। लेकिन जनता जरूर जानना चाहती है कि आखिर लड़कियों के हाथों शराब परोसने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया गया? कमांडो बनाने के लिए या महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के लिए तो ऐसी लड़ाई नहीं लड़ी गई। असल में लड़किया हमेशा से एक प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल होती आई हैं। वैसे भी शराब किसी कमसिन हाथों से परोसी जाए तो उसका नशा दो गुना हो जाता है। ऐसा कहा जाता है।
इतिहास गवाह है राजा महाराजा खुद अपने हाथों अपना प्याला तैयार नहीं करते थे। उन्हें पिलाने वाली भी महिला ही होती थी तो यह चलन कोई नया नहीं है। लेकिन शराब पिलाने वाली महिलाएं सिर्फ अमीर वर्ग यानी कि पहले के राजा-महाराजाओं के लिए ही उपलब्ध होंगी। यह विलासिता से जुड़ा कानून है जो सबके लिए नहीं होता और सब इसका मजा भी नहीं ले सकते। लड़कियों से शराब परोसवाने का कानून खास लोगों ने अपने लिए बनवाया है। असल में जब लड़कियां होंगी तो लोग उनके बहाने भी जाएंगे।
दूसरी बात यह है कि जब खूबसूरत लड़की आपसे यह पूछेगी कि ‘सर, एक पैग और दूं?’ तो आप मना कैसे कर पाएंगे। यानि कि इस कानून से सबको फायदा है। शराब की ज्यादा बिक्री होगी तो बार मालिकों को फायदा होगा और टैक्स के रूप में सरकार को भी।
माना जा रहा है कि लड़कियों के लिए नए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। इससे नुकसान होगा तो सिर्फ हमारी संस्कृति का। एक ऐसी संस्कृति का जहां महिलाओं को देवी तुल्य माना जाता है। जहां उनकी पूजा होती है, गांधी जी ने कहा था शराब हमारे शरीर और आत्मा दोनों का नाश करती है। उन्हें क्या पता था कि शराब बंद करने की बात तो दूर उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए हम लड़कियों का इस्तेमाल करने लगेंगे। हालांकि कुछ तथाकथित मॉडर्न महिलाओं ने इस फैसले का तहेदिल से स्वागत किया है। उनकी दलील है कि इसमें बुराई क्या है। लेकिन नशे में अगर उनके साथ कुछ और हो जाए तो कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी। चलिए यह भी मान लिया कि कोई उनके साथ शारीरिक छेड़छाड़ नहीं करेगा लेकिन नशे के बाद आंख और जुबान से होने वाली छेड़खानी को कैसे रोका जा सकता है। वहां काम करने वाली लड़कियों को इन चीजों का सामना तो करना ही पड़ेगा। खैर यह सब तरक्की का परिचायक हैं और मूल्यों के ह्रस का। अब यह फैसला तो हमारे और आपके हाथों में है कि हम किसे चुनते हैं?