पहचान पत्र का नया शिगूफा (अंक 22)
Jan 21st, 2008 by admin
दिल्लीवासियों को अब अपनी जेब में अपना पहचान पत्र रखना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शायद देश में ऐसा पहली बार हो रहा है जब आपको वहां का निवासी होने के लिए पहचान पत्र साथ लेकर चलना होगा। यह पहचान पत्र ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, ऑफिस, स्कूल या कॉलेज किसी भी रूप में हो सकते हैं। अगर किसी के पास कोई फोटो पहचान पत्र नहीं मिला तो उसे अपनी सफाई देने के लिए एसडीएम के पास जाना होगा। साथ में अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त का फोन नम्बर भी उसे देना होगा जो उसकी पहचान की पुष्टि कर सके। पहचान पत्र चेक करने का काम 15 जनवरी से शुरु हो जाएगा।
सरकार का मानना है कि दिल्ली में आतंकवादी गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। आए दिन यहां आतंकवादी कुछ न कुछ हरकतें कर बैठते हैं। दिल्ली में रोजाना हजारों लोग बाहर से आते हैं ऐसे में पहचान करना काफी मुश्किल होता है। पहचान पत्र की जांच नाकों पर पुलिस वाले करेंगे। इसके अलावा पुलिसकर्मी कहीं भी कभी भी आपको आपका पहचान पत्र दिखाने के लिए कह सकते हैं। दिल्ली के आसपास के इलाके से आने वालों को भी अपना पहचान पत्र अपने साथ रखना होगा। यानीकि अब आपको पहचान पत्र के जरिए अपनी पहचान बतानी पड़ेगी। सरकार का यह फैसला कितना कारगर साबित होता है यह तो 15 जनवरी के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इतना जरूर है कि लोगों में अभी से अपने पहचान पत्र को लेकर चिंता होने लगी है।
घरेलू महिलाओं को इससे काफी परेशानी हो सकती है। उन्हें अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि अगर वह सब्जी लेने पास के बाजार में जाएंगी तो क्या अपने गले में पहचान पत्र लटका कर जाएंगी, अगर बच्चों के स्कूल जाएंगी तो अपने पहचान पत्र लेकर जाएंगी। जो महिलाएं घरेलू हैं उन्हें तो अपना राशन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र लेकर ही चलना पड़ेगा। वैसे अब पुलिस वालों की ड्यूटी भी बढ़ गई है। उन्हें अब पहचान पत्र की जांच करने के साथ-साथ उन लोगों को एसडीएम कार्यालय भी ले जाना पड़ेगा जिनके पास ये कार्ड नहीं होंगे। फिर उनकी पहचान की खोज करनी पड़ेगी। सरकार के इस फैसले से गरीब तबके की परेशानी भी बढ़ सकती है। पुलिस के रवैये से सब परिचित हैं। वे कहीं भी किसी टेंपो चालक या रिक्शा वाले को रोक कर उसे अपना पहचान पत्र दिखाने के लिए बोल सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि दिल्ली की सड़कों पर रेहड़ी खोमचे लगाने वालों में से 80 फीसदी के पास उनका अपना पहचान पत्र नहीं है, उनका क्या होगा? ऐसे न जाने कितने सवाल आने वाले समय में उठने वाले हैं।