फिर एक नया विवाद (अंक-27)
Feb 9th, 2008 by admin
उत्तर भारतीयों पर इन दिनों चौतरफा मार पड़ रही है। अपनी मुंबई में राज ठाकरे की सेना का गुस्सा अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने उत्तर भारतीयों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दे दिया। लगता है उपराज्यपाल मुंबई के शिवसेना स्टाइल से ज्यादा प्रभावित हैं। पहले मुंबई में उत्तर -भारतीयों को नहीं आने देने की मुहिम छेड़ी गई, यूपी, बिहार के लोगों को ठाकरे की शिवसेना भगाने लगी। तेजेन्द्र खन्ना उससे भी काफी प्रभावित हुए। उन्होंने दिल्ली से बिहार व यूपी के लोगों के आगमन पर पाबंदी के लिए आई. कार्ड रखने का फरमान जारी कर दिया। खन्ना वैसे भी नौकरशाह रह चुके हैं। इसलिए उन्हें हर काम को बड़ी सफाई से करना आता है। वे राज ठाकरे या बाल ठाकरे की तरह सीधे-सीधे यूपी, बिहार-झारखंड के लोगों पर हमला बोलने केञ् लिए तो नहीं कह सकते हैं सो उन्होंने नौकरशाहों वाले अंदाज में उत्तर भारतीयों के नाम पर उन पर हमला बोला। गत गुरुवार को पुलिस के एक समारोह में श्री खन्ना ने कहा कि उत्तर भारतीय कानून तोड़ने में आगे हैं। वे कानून को तोड़कर गर्व महसूस करते हैं, वहीं दक्षिण भारत के लोग कानून का पालन करते हैं। उनका यह बयान आते ही राजनीति गलियारों में चर्चा फैल गई। चुनावी मौसम में दिल्ली के नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय साख के नेताओं ने भी इस बयान को हाथों-हाथ लपक लिया। लगे हाथ सभी नेताओं ने इस पर राजनीति शुरु कर दी।
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को छोड़ कांग्रेसी नेताओं ने भी खुलकर उनके बयान पर विरोध दर्ज कराया। आई. कार्ड मामले में उनका समर्थन करने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने भी एल.जी. के बयान पर आपात्ति जताई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. हर्षवर्धन ने उार भारतीयों का पक्ष लेते हुए एल.जी. को बयान वापस लेने की मांग की। वहीं रेलमंत्री लालू प्रसाद व बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुञ्मार ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति को इस प्रकार के बयान देना शोभा नहीं देता। भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने तो यहां तक कहा कि अगर एल.जी. बिना शर्त के अपने बयान को वापस नहीं लेते हैं तो उन्हें इस पद से हटा देना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियरंजन दास मुंशी भी एल.जी. के इस बयान से दुखी नजर आए।
उन्होंने यहां तक कह डाला कि कोई भी हो इस प्रकार के बयान का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो किसी भी नेता ने एल.जी. के बयान का समर्थन नहीं किया। वैसे ये नेता ऐसा कर भी नहीं सकते हैं। दिल्ली में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। अगले साल केंद्र का चुनाव है। दिल्ली के 40 फीसदी मतदाता बिहार, यूपी, झारखंड व कोलकाता केञ् हैं। ऐसे में उन्हें नाराज करना आसान नहीं होगा। लेकिन इस मामले में किरण बेदी का बयान सबसे सटीक बैठता है। बेदी ने कहा कि न उत्तर भारत के लोग, न दक्षिण भारत के लोग, बल्कि हमारे पूरे समुदाय में एक ऐसा वर्ग है जो खुद को कानून से ऊपर रखना चाहता है। यह वर्ग किसी खास हिस्से का नहीं है और आप सबको पता है कि इस वर्ग में किस प्रकार के लोग हैं। एल.जी. साहब को ऊपर भी ध्यान देना चाहिए।