महिलाओं के लिए असुरक्षित दिल्ली (अंक-28)
Feb 20th, 2008 by admin
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित राजधानी के अस्पतालों में धड़ल्ले से हो रही भ्रूण हत्या व कम होने वाले लिंगानुपात को बढ़ाने के लिए भले ही लाडली जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लागू करने का काम कर रही हों, मगर उनकी इन योजनाओं में दिल्ली पुलिस पलीता लगाने का काम कर रही है। पुलिस के आला अधिकारी राजधानी में महिला अपराध कम होने का दम भरते हैं। उनके द्वारा तरह-तरह के दावे-प्रतिदावे किए जाते हैं। मगर यह दावे सिर्फ हाथी के दिखाने वाले दांत ही साबित हो रहे हैं। दावों के प्रतिकूल वास्तविकता कुछ और ही है, जो मुख्यमंत्री की मंशा केञ् विपरीत है। मुख्यमंत्री चाहती हैं कि राजधानी में बालिकाओं और महिलाओं को स्वच्छंदता के साथ जीने का अधिकार मिले। उनके साथ छेड़छाड़ कम हो और पारिवारिक माहौल व उनकी सोच में बदलाव आए। मगर पुलिस के नकारात्मक रवैये के कारण दिल्ली की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। चाहे वह राह-बाजार हो, आधुनिक शॉपिंग मॉल्स हों, सिनेमा घर हों, चाहे वह बस हो या फिर स्कूल-कालेज हों, हर स्थान पर आज भी राजधानी की महिलाएं असुरक्षित हैं। यहां आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़, लूटपाट, बलात्कार, अगवा और हत्या जैसी घटनाएं घटित होती हैं। बावजूद इसके इनमें से अधिकांश छेड़छाड़ व चैन-झपटमारी की शिकायत दर्ज नहीं की जाती। यही वजह है कि दिल्ली देश के उन 35 शहरों में सबसे शीर्ष स्थान पर है जहां महिलाओं के साथ सर्वाधिक आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया जाता है। यहां सबसे उल्लेखनीय बात यह भी है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री ने भी अपने एक बयान में कहा है कि दिल्ली की महिलाएं थानों में भी सुरक्षित नहीं हैं।
राजधानी में बढ़ते महिला अपराध को लेकर राष्ट्र्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर गौर करें तो यह स्वयं सिद्ध हो जाता है कि दिल्ली महिला अपराध में न केवल शीर्ष स्थान पर है बल्कि यहां की महिलाएं और गर्भस्थ बालिका शिशु सुरक्षित नहीं है। क्योंकि यहां दहेज को लेकर ही शिशु को जन्म देने से पहले कई महिलाओं की हत्या कर दी जाती है। वर्ष 2005 व 2008 के आंकड़े बताते हैं कि प्रतिवर्ष यहां की करीब 27.1 प्रतिशत महिलाएं आपराधिक वारदातों का शिकार होती हैं, जोकि देश में होने वाली कुल आपराधिक घटनाओं का 14.1 प्रतिशत है। वर्र्ष 2005 में बलात्कार के 562 मामले दर्ज किए गए थे। जबकि अगवा करने के नौ सौ, यौन शोषण के 197 और दहेज हत्या के 94 मामले दर्ज किए गए थे। ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2008 तक इन घटनाओं में दो गुणा से भी अधिक वृद्धि हुई है। उपरोक्त सभी आकड़े इस बात को साबित करते हैं कि दिल्ली में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं?