माया के ‘सम्माननीय नेता’ (अंक 48)
Jul 15th, 2008 by admin
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के बल पर पहली बार अपने बलबूते पर सरकार बना कर सभी विपक्षी पार्टियों को ऐसी पटखनी दी कि वे अभी तक अपनी दुर्गती से उभर नहीं पाई हैं। यह माया के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले का ही कमाल है कि आज उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी स्वर्ण जाति के नेता बसपा के हाथी पर सवार होने के लिए लालायित नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जीत के बाद अब मायावती की नजरें प्रधानमंत्री पद पर हैं। वह आगामी लोकसभा चुनाव में इसी सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के बल पर केन्द्र की सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब देख रही हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकी माया के अपने ही नेता उनकी व उनकी पार्टी की छवि खराब करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में सरकार बनते ही बसपा के नेताओं ने अपनी मनमानी शुरु कर दी। इस मनमानी की शुरुआत मछली शहर-जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद उमाकांत यादव ने की। उन्होंने गत 28 मई 2007 को आजमगढ़ के फूलपुर में सड़क किनारे बनी कुछ दुकानों को बुल्डोजर से गिरवा दिया। हालांकि मायावती ने यादव के इस कारनामे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए अपने ही सरकारी बंगले के पास उसे अरेस्ट करवा दिया।
7 जून 2008 को मायावती मंत्री मण्डल के मत्स्य विकासमंत्री जमुना प्रसाद निषाद महाराजगंज के घूरपुर थाने में एक सिपाही की हत्या के आरोप में फंस गए। मजबूरन मायावती को निषाद को अपने मंत्री मण्डल से बाहर कर रास्ता दिखाना पड़ा और 10 जून को यूपी पुलिस ने पूर्व मंत्री बन चुके निषाद को अरेस्ट कर लिया। बसपा नेताओं की इन काली करतूतों का दौर यहीं खत्म नहीं हुआ। क्ब् जून को यूपी के पूर्व मंत्री और मिल्कीपुर क्षेत्र के बीएसपी विधायक आनन्द सेन यादव हाई-प्रोफाइल शशि अपहरण व हत्याकांड मामले में फंस गए। जिसके चलते उन्हें भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा।
अभी हाल ही में पार्टी के एक अन्य बाहुबली विधायक गुड्डू पंडित ने अपने कारनामों से एक बार फिर पार्टी का दामन दागदार कर दिया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गुड्डू पंडित नोएडा के सैक्टर-24 थाने का ए श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर है। लेकिन गत विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजू भैया को हरा कर अपराधी से पहली बार विधायक बने गुड्डू पंडित ने अपनी विधायिकी के बल पर अपने विरोधियों के खिलाफ फर्जी मुकद्में दर्ज करवाने शुरु कर दिये। अब सत्ता के नशे में चूर गुड्डू पंडित एक छात्रा के साथ बलात्कार करने व उसके खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के जुर्म में सलाखों के पीछे है। दिलचस्प बात यह है कि आपराधिक छवि वाले इस विधायक को सरकार की ओर से जेड प्लस सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी।
4 जुलाई 2008 को दिल्ली पुलिस ने वाहन चोरों के एक गैंग को पकड़ा। पकड़े गए वाहन चोरों से पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि आरिफ नाम का व्यक्ति इन चोरों से चोरी की गाडि़यां खरीदता है। पुलिस ने जब आरिफ को गिरफतार किया तो पुलिस भी यह जानकर दंग रह गई कि चोरी की गाडि़यां खरीदने वाला यह शख्स कोई आम आदमी नहीं बल्कि बहजोई से बहुजन समाज पार्टी का सभासद (पार्षद) है।
उपरोक्त सभी घटनाओं ने कहीं न कहीं बसपा की छवि को धूमिल ही किया है। अपराधियों का साथ भले ही आज अधिकांश राजनीतिक दलों की मजबूरी बन गया है लेकिन पार्टियों को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि जिस तरह एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है उसी तरह एक अपराधिक छवि वाला नेता भी पूरी पार्टी को बदनाम कर देगा।