कामयाबी के पांच वर्ष (वर्ष-6, अंक 1)
Sep 2nd, 2008 by admin
पांच साल पूर्व आपके सहयोग से ‘अपनी दिल्ली’ का जो छोटा सा पौधा लगाया था वह आज एक वृक्ष बन कर आपके सामने खड़ा है। इन पांच वर्षों के दौरान प्रबुद्घ पाठकों व विज्ञापन दाताओं ने जो अपार स्नेह एवं सहयोग हमें दिया उसी का नतीजा है कि आज पत्रका रिता के क्षेत्र में अपनी दिल्ली अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है। हालांकि समय-समय पर न जाने कितने समाचार पत्रों का प्रकाशन आरंभ होता है और कुछ महीनों अथवा साल दो साल के बाद वे अतीत का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन हमारे प्रबुद्घ पाठकों एवं विज्ञापन दाताओं ने अपनी दिल्ली में जो विश्वास व्यकित किया उसकी का नतीजा है कि पांच साल पूर्व मात्र चार पृष्ठस्न् के श्वेत-श्याम समाचार पत्र के रूप में शुरू हुआ अपनी दिल्ली समाचार पत्र आज रंगीन साज-सज्जा के साथ आठ पृष्ठ के रूप में आपकी सेवा कर रहा है।
कुछ तथाकथित साप्ताहिक समाचार पत्र पत्रकारिता के नाम पर चंद उद्योगपतियों का मुखोटा बन कर पैसे कमाने में जुटे हैं, लेकिन अपनी दिल्ली ने पत्रकारिता के महत्व को समझते हुए हर समाचार को निर्भय होकर प्रकाशित किया है। चाहे जनता की आवाज हो, चाहे विपक्ष की या फिर सरकार की, सभी मामलों में अपनी दिल्ली ने पत्रकारिता के फर्ज को पूरी तरह से निभाया है। इन पांच वर्षों के दौरान कुछ तथाकथित साप्ताहिक समाचार पत्रों ने अपनी दिल्ली की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा कर अपनी दिल्ली को तरह-तरह से बदनाम करने का घिनोना प्रयास भी किया, लेकिन हमारे प्रबुद्घ पाठकों एवं विज्ञापन दाताओं ने हर बार अपनी दिल्ली में पूर्ण विश्वास व्यकित करते हुए विरोधियों को मुंह तोड़ जवाब दिया है। जिसके लिए अपनी दिल्ली परिवार के सभी सदस्य हमारे प्रबुद्घ पाठकों एवं विज्ञापन दाताओं के सदैव आभारी रहेंगे। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपका यह सहयोग भविष्य में भी इसी तरह हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा और अपनी दिल्ली पहले से कहीं अधिक मुखर व प्रखर होकर समाज की सेवा करता रहेगा।