सुबह और शाम जाम ही जाम (वर्ष-6, अंक-4)
Sep 15th, 2008 by admin
दिल्लीवासी आजकल सड़कों पर जाम की समस्या से खासे त्रस्त हैं। वैसे तो दिल्ली के विभिन्न मार्गों पर ट्रेफिक जाम रहना दिल्ली की नियति बन चुका है लेकिन बरसातों के कारण ट्रेफिक जाम की समस्या और भी गंभीर हो गई है। हालत यह है कि मात्र 10 से 20 किलोमीटर का रास्ता तय करने के लिए वाहन चालकों को दो से तीन घंटे तक सड़कों पर रेंगना पड़ता है। दिल्ली सरकार द्वारा मुखय मार्गों को सिग्नल फिरि बनाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं और विभिन्न मुखय चौराहों पर अंडर पास या ओवर ब्रिज का निर्माण भी करवाया जा रहा है। बावजूद इसके जाम की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। वैसे तो दिल्ली की अधिकांश सड़कों पर ट्रेफिक की स्थिति यह है कि कोई भी वाहन चालक 25 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफतार से अधिक अपना वाहन नहीं चला पाता है, लेकिन हाल ही में हुई बरसातों ने दिल्ली की अधिकांश सड़कों पर गड्ढ की ऐसी बरसात कर दी है कि अब वाहन चालकों का ध्यान वाहन चलाने से ज्यादा वाहन बचाने में लगा रहता है।
एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में वाहनों की संखया लगभग 60 लाख के आसपास है। इनमें से करीब 98 प्रतिशत वाहन 24 घंटे सड़कों पर ही रहते हैं। दिल्ली की सड़कें जहां दिन में वाहन चलाने के काम आती हैं वहीं रात के समय वाहन पार्क करने के लिए। दिल्ली में वाहन पार्किंग की समस्या एक गंभीर समस्या है। आज एक-एक परिवार के पास दो से चार वाहन हैं लेकिन इनमें से एक भी वाहन खड़ा करने के लिए पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते अधिकांश वाहन मालिकों को दिन के समय अपनी दुकानों अथवा कार्यालयों के आगे तथा रात के समय अपने घर के आगे बनी सड़क पर अपने वाहन पार्क करने पड़ते हैं।
दिल्ली में ट्रेफिक नियमों की अनदेखी भी ट्रेफिक जाम का एक बहुत बड़ा कारण है। प्रतिबंध के बावजूद भी रिंग रोड अथवा आउटर रिंग रोड पर साईकिल, रिकशा, रेहड़ी वाले बेखौफ होकर सड़क के बीचोंबीच चलते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह साईकिल अथवा रिकशा चालक लाल बात्ति की भी परवाह नहीं करते हैं और बिना सिग्नल के ही जिधर चाहे, जहां चाहे मुड़ जाते हैं। जिसके चलते वाहनों की गति तो अवरुद्घ होती ही है साथ ही दुर्घटनाएं भी घटती रहती हैं। कहने को इन दोनों मुखय मार्गों के दोनों ओर सर्विस लेन का निर्माण किया गया है लेकिन यह सर्विस लेन अवैध पार्किंग, अवैध पटरी बाजार अथवा अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी हैं।
दिल्ली में अधिकांश चौराहों के चारों ओर रिकशा वालों का जमघट लगा रहता है जिसके चलते कोई भी वाहन चालक बाईं ओर भी मुड़ने में भारी परेशानी महसूस करता है। इस मामले में दिल्ली ट्रेफिक पुलिस की भूमिका भी बेहद चौकाने वाली है। उन्हें लाल बात्ती क्रोस करते हुए अथवा बिना हेलमेट दुपहिया चलाते हुए चालक तो दिखाई दे जाते हैं लेकिन चौराहों पर रिकशा वालों का लगा रहने वाला जमावड़ा दिखाई नहीं देता। बात स्पष्ट है कि वे भी अपनी ड्यूटी से ज्यादा जेब भरने में विश्वास रखते हैं।