नासूर बनता आतंकवाद (वर्ष-6, अंक 7)
Sep 24th, 2008 by admin
देश में फेलता आतंकवाद सुरक्षा ऐजेंसियों के लिए किसी नासूर से कम नहीं है। कभी जम्मु-कश्मीर, आसाम जैसे सीमावर्ती राज्यों तक सीमित रहने वाली आतंकवादी गतिविधियां अब देश के हर राज्य में आम हो गई हैं। आतंकवादी किसी भी राज्य, किसी भी शहर में बेखौफ होकर सीरियल बलास्ट जैसी घटनाओं को अन्जाम देकर साफ बच निकलते हैं और सुरक्षा ऐजेंसियां घटनाओं की जांच पड़ताल करती रह जाती हैं। इस आतंकवाद ने अब तक न जाने कितने मासूम लोगों की जान ले ली है और न जाने कितने जवान इसका मुकाबला करते हुए शहीद हो गए हैं। बावजूद इसके सरकार अभी तक आतंकवाद के सफाए के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। इसी का नतीजा है कि गत 19 सितमबर शुक्रवर 2008 को एक और जांबाज आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गया। वर्षों तक दिल्ली पुलिस की सेवा में रहे पुलिस इंस्पेकटर मोहन चंद शर्मा की गिनती न केवल जांबाज पुलिसकर्मियों में होती थी बल्कि उन्हें अपराधियों का दुश्मन माना जाता था। यह उनकी देशभकति और बहादुरी का ही नमूना है कि अपने बेटे को डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से जूझता हुआ छोड़ कर वे आतंकवादियों से लोहा लेने जामिया नगर इलाके में पहुंच गए। श्री शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इस इलाके के एक फलैट में छिपे दो आतंकवादियों को तो ढेर कर दिया लेकिन इसकी कीमत उन्हें श्री शर्मा के बलिदान से चुकानी पड़ी।
श्री शर्मा की मौत पर पक्ष विपक्ष के छोटे बड़े नेताओं ने मगरमछी आंसू बहाते हुए उनकी शहादत को नमन किया और आतंकवाद के खिलाफ डट कर मुकाबला करने का आह्वन किया। ऐसा आह्वन हमारे नेता हर आतंकी घटना के बाद करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि देश में फेल रहे आतंकवाद की असली जड़ हमारे यह नेता ही हैं। वोटों की राजनीति और विशेष वर्ग को खुश रखने के चक्कर में हमारी केन्दर सरकार अभी तक कोई भी ऐसा कड़ा कानून नहीं बना पाई है जिसके बल पर आतंकवाद का सफाया किया जा सके। यदि कुच राजनैतिक दल अथवा विपक्षी पार्टियां आतंकवाद के खिलाफ पोटा जैसे कड़े कानून की मांग करती भी हैं तो कांग्रेस सरकार व मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने वाले उनके सहयोगी दल यह कह कर इस मांग को ठुकरा देती हैं कि पोटा जैसे कानून की आड़ में मुस्लिम समुदाय के लोगों को बेवजह परेशान किया जाएगा।
सवाल यह उठता है कि जब पोटा जैसा कानून आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाया जाएगा न कि किसी धर्म विशेष के लोगों को तंग करने के लिए, तो फिर यह नेता ऐसा कियों सोचते हैं कि इस कानून का इस्तेमाल केवल मुस्लिम समुदाय के खिलाफ ही होगा। यह बात अलग है कि देश में होने वाली अधिकांश आतंकवादी गतिविधियों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आतंकियों का ही हाथ होता है, जिन्हें प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की खुफिया ऐजेंसी आईएसआई का समर्थन मिला हुआ है। इस बात को नए कानून का विरोध करने वाले नेता भी भली भांति जानते हैं।