कमजोर होती भाजपा (वर्ष-6, अंक 19)
Dec 16th, 2008 by admin
हाल ही में देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा लगातार कमजोर हो रही है और कमजोर मानी जाने वाली कांग्रेस धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ रही है। पांच राज्यों के चुनावों को लोकसभा चुनाव का सैमिफाइनल माना जा रहा था और यह माना जा रहा था कि इन राज्यों के चुनाव में भाजपा न केवल अपनी शक्ति को बढ़ाएगी बल्कि दिल्ली में दस साल पुरानी कांग्रेस सरकार को भी साथ से बेदखल कर देगी। लेकिन भाजपा नेताओं के मुताबिक इस बार के परिणाम चौंकाने वाले आए हैं। दिल्ली में सरकार बनाने का सपना तो अधूरा रह ही गया साथ ही राजस्थान में भी साथ से बेदखल होना पड़ा। यह तो शुक्र है कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और छात्तिसगढ़ में डॉ. रमन सिंह ने अपनी लोकप्रियता के बल पर भाजपा सरकार को बचाने में कामयाबी हासिल कर ली वरना वहां भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती थी।
दोनों राज्यों में से केवल छत्तिसगढ़ ही एक ऐसा राज्य है जहां भाजपा पहले की तरह मजबूत स्थिति में बनी हुई है। जबकि मध्य प्रदेश में भाजपा भले ही अपने सरकार बचाने में कामयाब रही हो लेकिन प्रदेश में उसकी लोकप्रियता व शक्ति का ग्राफ पिछले चुनाव की अपेक्षा काफी कम हुआ है। जबकि कांग्रेस ने अपनी स्थिति काफी मजबूत की है। गत विधानसभा चुनाव में राजस्थान में प्रचण्ड बहुमत के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सि पर काबिज़ हुई महारानी वसुंधरा राजे सिंधिया के अडि़यल रवैये, गूर्जर आन्दोलन ने मात्र मांच वर्षों के भीतर ही भाजपा को लगभग पुरानी स्थिति में ला खड़ा किया है। भाजपा की कमजोर हुई इस स्थिति पर भाजपा दिग्गजों को गहन मंथन करने की आवश्यकता है वरना आगामी लोकसभा चुनाव में आडवाणी के प्रधानमंत्री बनने का सपना, सपना ही रह जाएगा।