डीडीए का नया कारनामा (वर्ष-6, अंक 23)
Jan 14th, 2009 by admin
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा हाल ही में करीब पांच हजार फ्लेटो के लिए किये गए ड्रॉ में जो घोटाला सामने आया है उसने एक बार फिर यह सिद्घ कर दिया है कि दिल्ली का विकास तथा दिल्ली में रह रहे जरूर्त्मनद के लिए आशियाना मुहैया कराने का दावा करने वाला डीडीए अब केव्ल भूमाफियाओं, प्रोपर्टी डीलरों तथा भ्रष्ट अधिकारियों की कमाई का जरिया बन कर रह गया है। ऐसा नहीं है कि डीडीए में फ्लेट आवंटन घोटाला पहली बार हुआ है। वर्षों पहले भी ऐसे ही एक घोटाले ने डीडीए का दामन दागदार किया था। लेकिन इस बार के घोटाले ने डीडीए द्वारा पारदर्शी तरीके से ड्रॉ निकालने के दावे की पूरी तरह से पोल खोल कर रख दी है। फ्लेट आवंटन में घोटाला होने का एक बड़ा कारण डीडीए द्वारा फ्लेटों की निर्धारित कीमत तथा बाजार भाव में भारी अंतर होना भी रहा है।
डीडीए द्वारा जिस एमआईजी फ्लेट की कीमत ब् से ब्भ् लाख रुपये निर्धारित की गई थी, उसका बाजार भाव करीब एक करोड़ रुपये है। यही कारण है कि मात्र 5000 फ्लेटों के लिए छः लाख से अधिक फार्म भरे गए। यदि इन सभी फार्मों की गहराई से जांच की जाए तो यह बात स्पष्टस्न् हो जाएगी कि एक-एक भूमाफिया ने अलग-अलग फर्जी नामों से अकेले ही सैकड़ों फार्म जमा करवाए।
इसके अलावा अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के आवेदक भी आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि वे इतने महंगे फ्लेटों के लिए आवेदन कर सकें। इस मौके का फायदा भी भूमाफियाओं व भ्रष्ट अधिकारियों ने उठाया। जिसका सबूत राजस्थान में एक ही विशेष जाति के आवेदकों के नाम पर कई फ्लेट आवंटित होना है।
दिलचस्प बात यह है कि इन सभी सफल आवेदकों के नाम के आगे एक ही मोबाइल नミबर दर्ज था, जो इस बात को पूरी तरह से प्रमाणित करता है कि डीडीए द्वारा किये गए ड्रॉ में किसी न किसी रूप में अनियमितता बरती गई है।
यदि डीडीए वास्तव में ही जरूरतमंद लोगों को आशियाना मुहैया कराना चाहता है तो उसे चाहिए कि ड्रॉ से पहले प्राप्त हुए सभी आवेदनों की बारीकी से जांच पड़ताल करे और इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ सखत कार्रवाई करे तभी वह अपने मकसद में कामयाब हो सकता है। अन्यथा भविष्य में भी ऐसे ही घोटाले होते रहेंगे और भ्रष्ट अधिकारी तथा भूमाफिया हमेशा की तरह आगे भी जरूरतमंद लोगों का हक छीन कर करोड़ों की काली कमाई करते रहेंगे।