आखिर नारी कब तक यूं ही संपत्ति बनी रहेगी (अंक - 37)
Apr 22nd, 2007 by admin
देश की आधी आबादी अभी भी आधा जीवन जी रही है। वह अपने अधिकारों से न केवल वंचित है बल्कि उस पर तरह-तरह की पाबंदियां भी थोपी जा रही है। अगर फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी एक विदेशी कलाकार को चुंबन दे देती है तो हिंदू अतिवादी नैतिकता की दुहाई देते हुए आसमान सिर पर उठा लेते हैं। अगर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की एक हिंदू लड़की प्रियंका मुसलमान लड़के उमर से शादी कर लेती है तो इससे हिंदू व मुसलमान दोनों संप्रदायों के अस्तित्व पर आंच आ जाती है, लेकिन जब मुंबई के टाटा मैमोरियल अस्पताल में कैंसर पीडि़त 16 वर्षीय मासूम लड़की के साथ बलात्कार कर उसकी कोख में पल रहे शिशु को जन्म से पूर्व ही मरने के लिए अभिशप्त छोड़ दिया जाता है तो न तो हिन्दुओं की आत्मा जागृत होती है और न ही मुसलमानों की। स्त्रियों को समाज में आज भी पुरुष की संपत्ति समझा जाता है और संपत्ति केवल भोग के लिए ही होती है। समाज की इसी मानसिकता के परिणामस्वरूप ही लड़कों की तुलना में लड़कियों की जन्म दर गिरती जा रही है। फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने विदेशी कलाकार रिचर्ड गेरे को अपनी मर्जी से चुंबन नहीं दिया था। बावजूद इसके हिन्दू अतिवादियों को यह अनैतिक और भारतीय संस्कृति का घोर अपमान लगा। उस अपराध के लिए जो कि शिल्पा शेट्टी ने किया ही नहीं उसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए जगह-जगह प्रदर्शन कर उसके पुतले जलाए जा रहे हैं। मगर इलाज के दौरान अस्पताल में बलात्कार का शिकार हुई युवती, अपने दोस्त से अपनी पत्नी का बलात्कार करवाने व उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बडगांव की पंचायत में महिला के बदले महिला की मांग करने वाले फैसले पर सभी संप्रदायों के ठेकेदार पूरी तरह से मौन हैं। दरअसल जब तक हमारे दिमाग में संपत्ति के रूप में जर और जमीन के साथ जोरू को भी शामिल करने की धारणा कायम रहेगी तब तक आधी आबादी अधिकारों से वंचित रह कर इसी प्रकार से अपने अरमानों का गला घोंटती रहेगी। अगर प्रियंका की तरह कोई लड़की अपने अधिकार पाने के लिए किसी उमर का हाथ थामने का साहस दिखाएगी तो उसके साथ समाज की सभी लड़कियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अदालत के प्रियंका व उमर की शादी पर स्वीकृति की मोहर लगाने के फौरन बाद भोपाल के सिंधी समुदाय ने तालिबान की तर्ज पर फरमान जारी कर दिया कि लड़कियां अब दुपट्टे से मुंह नहीं ढकेंगी, न ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करेंगी और न ही दोपहिया वाहन चलाएंगी। यह सब जानते हैं कि गर्मी के मौसम में लू के थपेड़ों की मार से बचने के लिए मुंह ढंकने से बीमार पड़ने का खतरा कम हो जाता है। इसी प्रकार अगर किसी भी विषम परिस्थिति में यदि लड़की के पास मोबाइल है तो वह इसके जरिए पुलिस या अपने परिचितों से संपर्क कर उन्हें अपनी सहायता के लिए बुला सकती है। आंकड़े तो यही बताते हैं कि रिक्शा या अन्य वाहन के इंतजार में खड़ी लड़कियां मनचलों के हाथों छेड़छाड़ या दूसरी घटनाओं का ज्यादा शिकार बनती हैं। अगर हिन्दू संगठन यह सोचते हैं कि इससे लड़के-लड़कियों के मिलने के अवसर कम हो जाएंगे तो यह महज खाम ख्याली है। क्योंकि जिन्हें मिलना होगा वह मिलने के रास्ते निकाल ही लेंगे। मगर इससे भी बड़ा सवाल तो यह है कि सारी पाबंदियां लड़कियों पर ही क्यों थोपी जाए? क्या लड़कों पर भी किसी प्रकार की पाबंदी लगाने की हिम्मत उनमें है? नारी को भोग्या व संपत्ति समझने की मानसिकता का सबसे घिनौना रूप तो मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में देखने में आया है। इस अस्पताल में कैंसर बीमारी का इलाज कराने आई एक 16 वर्षीय मासूम बालिका को अस्पताल में ही कर्मचारियों ने अपनी हवस का शिकार बना डाला। विडंबना तो यह है कि डॉक्टरों अनुसार इस बालिका के पेट में पांच माह का गर्भ पल रहा है जबकि इसकी खुद की आयु केवल माह बची है।
इसी प्रकार औरत को संपत्ति एक अन्य घटना उत्तर के सहारनपुर जिले के बड़गांव में सामने आई है। इस गांव में दो बच्चों की मां अपने प्रेमी के साथ भाग गई। जिस पर उसके पति ने पंचायत में गुहार लगाई थी। पंचायत ने महिला को भगा ले जाने वाले परिजनों को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वह महिला को लौटाने के साथ ही पीडि़त पति को एक लाख रुपए अदा करे। वरना वह व्यक्ति पत्नी को भगा ले जाने वाले व्यक्ति के परिवार को दो लाख रुपए देगा और इसके एवज में उनकी बहु-बेटी को प्राप्त कर उसके साथ कैसा सलूक करने के लिए स्वतंत्र होगा। यह भी एक प्रकार से तालिबानी फैसले की याद ताजा कराता है।
इस मामले में पुलिस की भूमिका भी कम शर्मनाक नहीं है। जिसने तालिबानी फैसला सुनाने वाली पंचायत के सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई करना तो दूर उलटे इस मामले की शिकायत करने थाने पहुंचे लोगों को ही घर से फरार हुए प्रेमी जोड़े को 24 घंटे के भीतर पुलिस के सामने पेश करने का अल्टीमेटम दे दिया। स्त्री को संपत्ति मानने और रिश्तों की पवित्रता को कलंकित करने वाली तीसरी घटना देश की राजधानी दिल्ली में घटित हुई। इस घटना में पति ने कार में ही अपने दोस्त को अपनी पत्नी के साथ बलात्कार करने को कहा। इस घटना से महिला को इतना गहरा सदमा पहुंचा है कि उसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि कमल शांडिल्य और स्वाति ने लगभग दो वर्ष पहले ही प्रेम विवाह किया था और उनका एक साल का एक बेटा भी है। पिछले कुछ समय से दोंनों के बीच मिठास खत्म हो गई थी। स्वाति को सबक सिखाने के लिए ही कमल ने अपने दोस्त सौरभ को कार में ही स्वाति के साथ बलात्कार करने के लिए उकसाया था। यह सही है कि कमल और स्वाति के संबंध मधुर नहीं रह गए थे और दोनों अलग रहना चाहते थे तो कमल अपनी पत्नी की इज्जत के साथ खिलवाड़ करवाने के बजाय उसे तलाक दे सकता था। अब समय आ गया है कि समाज की जर-जोरू व जमीन को एक साथ और बलशाली के अधीन रखने की धारणा को बदलना होगा। इसके लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। युवा पीढ़ी को नए समाज की रचना के लिए स्वयं को भी नई उंचाईयों तक पहुंचाना होगा ताकि समाज उनके सामने खुद-ब-खुद नत-मस्तक हो जाए।