आस्था के साथ खिलवाड़ आखिर कब तक (अंक 48)
Jul 10th, 2007 by admin
जम्मू कश्मीर की सरकार खास तौर पर अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने अपनी अपराधपूर्ण लापरवाही के कारण लगातार दूसरे वर्ष लाखों श्रद्घालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के साथ ही उनकी आस्था से खिलवाड़ किया है।
अमरनाथ की पवित्र गुफा में हर साल बर्ड्ड के प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग के दर्शन करने की आस लेकर लाखों यात्री सैंकड़ो मील दूर से और दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार कर वहां पहुंचते हैं। मगर इस बार अधिकृत यात्रा शुरू होने से पहले ही शिवलिंग पिघल गया। जिस कारण लाखों श्रद्घालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्लोबल वार्मिंग और इसे प्राकृतिक प्रक्रिया बताकर अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
जबकि भूगर्भ वैज्ञानिकों का स्पष्ट रूप से मानना है कि शिवलिंग मौसम की गड़बड़ी के कारण नहीं पिघला है बल्कि अधिकारिक रूप से यात्रा शुरू होने के डेढ़ महीने पहले से वहां हजारों यात्रियों के अनधिकृत रूप से पहुंच जाने और वातावरण में गर्मी पैदा करने वाले उपकरण इस्तेमाल करने के कारण ही अमरनाथ गुफा के आसपास का वातावरण गर्म हो गया जिसकी वजह से बर्फानी बाबा का शिवलिंग पिघल गया।
इस बार अपै्रल व मई के दौरान शिवलिंग की उंचाई 12 फुट से भी अधिक थी। इस बार अमरनाथ की यात्रा अधिकृत रूप से शुरू करने की तिथि 30 जून निर्धारित की गई थी। मगर यात्रा शुरू होने से पहले ही शिवलिंग पूरी तरह से पिघल चुका था।
जम्मू टूरिस्ट ट्रेड एंप्लायीज फेडरेशन का कहना है कि यात्रा शुरू होने से पहले ही 500 अनिवासी भारतीयों ने गुफा की यात्रा की। यह लोग गुफा के पास चार दिन तक डेरा डाले रहे। इस दौरान उन्होंने रोशनी के लिए जेनरेटर और खाना बनाने के लिए रसोई गैंस का इस्तेमाल किया। जिसकी वजह से पवित्र गुफा के पास का तापमान बढ़ गया। यह भी शिवलिंग पिघलने का एक प्रमुख सबब बना। इसके अलावा अति विशिष्ट लोगों को लाने-ले जाने के लिए हेलीकोप्टर की उड़ानों का भी वातावरण पर काफी प्रतिकूल असर पड़ा।
निजी चैनलों द्वारा दिखाई गई सीडी में फेडरेशन के आरोपो की पुष्टि होती है। इस सीडी में दिखाया गया है कि सुरक्षा कर्मियों समेत अनेक लोग शिवलिंग को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह लोग सभी व्यवस्थाओं को धात्त बताते हुए न केवल शिवलिंग पर चढ़ गए थे बल्कि उन्होंने बार-बार उसे अपनी बाहों में जकड़ने के साथ ही उसे खरोच भी रहे थे।
इतना ही इन लोगों ने शिवलिंग के पास धूप-बात्ती, अगरबत्ती व दिए भी जलाए, जिसका वातावरण पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। जिसकी वजह से शिवलिंग समय से काफी पहले ही पिघल गया। जिससे हिम शिवलिंग के दर्शन करने आने वाले लाखों लोग निराश हो गए। इस सीडी में एक व्यक्ति को यह कहते दिखाया गया है कि वह पिछले कई साल से यात्रा शुरू होने से पहले ही अपने साथियों के साथ अवैध रूप से यहां पहुंचकर शिवलिंग के दर्शन करता रहा है। उसका यह भी कहना है कि यात्रा शुरू होने से पहले शिवलिंग के दर्शन करने की एवज में होटल वालों को ज्यादा पैसे देने के अलावा सुरक्षा कर्मियों को भी रिश्वत देनी पड़ती है। यदि पहलगाम के होटल वालों की बात पर विश्वास करें तो इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही हजारो लोग अवैध रूप से अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुंचकर शिवलिंग के दर्शन कर चुके थे। उनका कहना है कि पैसे वाले कुछ भी कर सकते हैं। इन अवैध यात्रियों की सुविधा के लिए मई-जून के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा भी संचालित की गई।
जाहिर सी बात है कि इस गोरख धंधे में अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से लेकर दलाल व सुरक्षाकर्मियों तक की मिलीभगत रही है। यह बात दीगर है कि उनकी चंद पैसे कमाने की इस फितरत के कारण लाखों श्रद्घालुओं की आस्था पर कुठाराघात हुआ है।
देहरादून की एकेञ्डमी फॉर माउंटेन एन्वायरमेंट के निदेशक आर. श्रीधर शिवलिंग पिघलने के संबंध में अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूण कुमार की ओर से पेश की गई दलीलों को सिरे से नकारते हैं।
उनका कहना है कि शिवलिंग पिघलने का असली कारण अव्यवस्था व बोर्ड की पैसा कमाने की लालसा जिम्मेदार है। उनका कहना है कि दलाल व सुरक्षाकर्मी की मिलीभगत से अवैध यात्रियों को पैसा लेकर पवित्र गुफा में प्रवेश की अनुमति दे दी जाती है। जिसका भी वहां के वातावरण पर विपरीत असर पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने पिछले कुछ से समय से इस यात्रा की अवधि एक माह से बढ़ाकर दो माह कर दी है। इतना ही नही उसने गुफा तक दुकाने लगाने की अनुमति भी दे दी है। इसी प्रकार पहलगाम व बालटाल दोनों ही मार्गों पर अनवरत चलने वाले लंगरों की संख्या भी कई गुना बढ़ गई है। एक-एक लंगर शिविर में भोज्य सामग्री बनाने के लिए प्रतिदिन रसाई गैंस के कई-कई सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है। इससे भी अमरनाथ की पवित्र गुफा के आसपास वातावरण में गर्मी बढ़ रही है।
हालांकि अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अरूण कुमार का कहना है कि यात्रा की अवधि बढ़ाने का शिवलिंग पिघलने की घटना के साथ कोई संबंध नहीं है। उनका ऐसा कहना सरासर गलत है क्योंकि वर्षों से अमरनाथ की यात्रा केवल श्रावण माह में करने की अनुमति दी जाती थी तब शिवलिंग के दर्शन भी रक्षाबंधन के दिन तक होते थे।
दरअसल अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इस यात्रा को पर्यटन का रूञ्प देने के साथ ही पैसा कमाने का एक जरिया बना लिया है। जिसके चलते उसने यात्रा मार्ग पर लगने वाली दुकानों की संख्या काफी अधिक बढ़ाने के साथ ही दिन में हेलिकॉप्टर की कई-कई उड़ाने संचालित करने की अनुमति भी दी है। हेलीकॉप्टर की लैंडिग व टेकऑफ के लिए हेलीपेड पवित्र गुफा के एकदम करीब बनाया गया है। हेलीकॉप्टर के दिन में कई कई बार आने-जाने का पूरे वातावरण पर काफी विपरीत असर पड़ रहा है। मगर अमरनाथ श्राइन बोर्ड इस ओर से आंखे मूंदे हुए है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष हिम शिवलिंग बना ही नहीं था। शिवलिंग न बनने की खबर से यात्रा का रजिस्ट्रेशन कराने वाले यात्री अपनी यात्रा रद्द कर सकते हैं जिससे बोर्ड को लाखों रुपये की आमदनी से हाथ धोना पड सकता है।
इस आंशका के मद्देनजर श्राइन बोर्ड ने टनों बर्फ मंगवा कर कृत्रम शिवलिंग बनाने का प्रयास किया था। इसका खुलासा हो जाने पर श्रद्घालुओं में काफी तीव्र प्रतिक्रिया हुई थी। जिसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने इस सारे मामले की जांच करा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की घोषणा की थी।
इस घोषणा को एक साल बीत गया है मगर इस संबंध में एक भी दोषी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी नहीं मिली है। अगर राज्यपाल और राज्य सरकार ने लोगों को धार्मिक ठेस पहुंचाने वाली इस घटना को गंभीरता से लिया होता तो आज अमरनाथ की पवित्र गुफा के हालात इतने खराब नहीं होते। राज्य सरकार को यह सोचना चाहिए कि अगर इसी तरह से बार-बार श्रद्घालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता रहा तो फिर भला कौन सा यात्री सैंकड़ों मील दूर से यहां की दुर्गम यात्रा पर आएगा। जब यात्री ही नहीं आयेंगे तो फिर भला सरकार और अमरनाथ श्राइन बोर्ड का राजस्व कैसे बढ़ेगा?
ऐसा लगता है कि जम्मू कश्मीर सरकार भोले बाबा के भक्तों के सब्र का इम्तिहान ले रही है। अगर भक्तों के सब्र का पैमाना छलक गया तो यह न तो राज्य सरकार और न ही अमरनाथ श्राइन बोर्ड के हक में होगा।